Sunday, July 20, 2008
Sunday, July 6, 2008
तुम नहीं हो
This is a nice poem which you will certainly like.
यह रात है यह चाँद है पर तुम नहीं हो
ये लौ है ये चिराग है पर तुम नहीं हो
रात की खामोशियों में बस तुम्हारी
आवाज़ ही आवाज़ है पर तुम नहीं हो
मेरे काँधे पर तुम्हारे गेसुओं की
छुवन का एहसास है पर तुम नही हो
आज भी मेरे सिरहाने पर तुम्हारी
एक अधखुली किताब है पर तुम नहीं हो
उस मेज़ की दराज़ में रखा तुम्हारा
एक ख़त भी मेरे पास है पर तुम नहीं हो.
यह रात है यह चाँद है पर तुम नहीं हो
ये लौ है ये चिराग है पर तुम नहीं हो
रात की खामोशियों में बस तुम्हारी
आवाज़ ही आवाज़ है पर तुम नहीं हो
मेरे काँधे पर तुम्हारे गेसुओं की
छुवन का एहसास है पर तुम नही हो
आज भी मेरे सिरहाने पर तुम्हारी
एक अधखुली किताब है पर तुम नहीं हो
उस मेज़ की दराज़ में रखा तुम्हारा
एक ख़त भी मेरे पास है पर तुम नहीं हो.
Saturday, July 5, 2008
यार
यार सब पीछे हट गए मेरे
जैसे के हाथ काट गए मेरे
जिनको सींचा गया था बरसों तक
ख्वाब पल में उचट गए मेरे
तुझसे बाबस्ता कई ब्योरे थे
हाय वो पन्ने फट गए मेरे
तेरी नज़रों के एक इशारे पर
मुझसे सब गम लिपट गए मेरे
अपनी गूंजायिशों से घबरा कर
दर्द सारे सिमट गए मेरे
खाने-खाने से खिंच गए शायद
जान, जी, जिस्म बाँट गए मेरे
खेलना जानते नहीं तूफ़ान
सारे मोहरे उलट गए मेरे
जैसे के हाथ काट गए मेरे
जिनको सींचा गया था बरसों तक
ख्वाब पल में उचट गए मेरे
तुझसे बाबस्ता कई ब्योरे थे
हाय वो पन्ने फट गए मेरे
तेरी नज़रों के एक इशारे पर
मुझसे सब गम लिपट गए मेरे
अपनी गूंजायिशों से घबरा कर
दर्द सारे सिमट गए मेरे
खाने-खाने से खिंच गए शायद
जान, जी, जिस्म बाँट गए मेरे
खेलना जानते नहीं तूफ़ान
सारे मोहरे उलट गए मेरे
साकी
साकी भी तुम जाम भी तुम
शमा भी तुम शाम भी तुम
गम छोटे डर गम छोटे
दर्द भी तुम आराम भी तुम
तुम में छुपे अशार कई
मेहनत भी तुम ईनाम भी तुम
पलकों का उठाना गिरना
कासिद भी तुम पैगाम भी तुम
हर लम्हा तुम हर जानिब
फुर्सत भी तुम काम भी तुम
तुम से शुरू तुम पे ही ख़तम
इश्क भी तुम अंजाम भी तुम
शमा भी तुम शाम भी तुम
गम छोटे डर गम छोटे
दर्द भी तुम आराम भी तुम
तुम में छुपे अशार कई
मेहनत भी तुम ईनाम भी तुम
पलकों का उठाना गिरना
कासिद भी तुम पैगाम भी तुम
हर लम्हा तुम हर जानिब
फुर्सत भी तुम काम भी तुम
तुम से शुरू तुम पे ही ख़तम
इश्क भी तुम अंजाम भी तुम
महबूब
मेरे महबूब के हैं बाल मेरे कंधे पर
गाल होते हैं सुर्ख लाल मेरे कंधे पर
होश तुझको अगर नहीं है तो मुझको भी कहाँ
यार ऐसे न हो बेहाल मेरे कंधे पर
जो वज़न है वो मेरे दिल के हवाले कर दे
भार इतना न मगर दाल मेरे कंधे पर
दाने चुगने के लिए आए तो पंछी न गए
एक सैय्याद का है जाल मेरे कंधे पर।
गाल होते हैं सुर्ख लाल मेरे कंधे पर
होश तुझको अगर नहीं है तो मुझको भी कहाँ
यार ऐसे न हो बेहाल मेरे कंधे पर
जो वज़न है वो मेरे दिल के हवाले कर दे
भार इतना न मगर दाल मेरे कंधे पर
दाने चुगने के लिए आए तो पंछी न गए
एक सैय्याद का है जाल मेरे कंधे पर।
सुरूर
कौन कहता है हम ने पी ज्यादा
दोस्तों हम से तो गिरी ज्यादा
एक तेरे ग़म का भी सुरूर रहा
फिर यह काफिर भी कुछ चढी ज्यादा
तेरी नज़रों की जालसाजी में
हो गई हम से मयकशी ज्यादा
आज बैठा था बेहिजाब कोई
आज ही उठी प्यास भी ज्यादा
नामाबर उल्टे पाँव लौट आया
तेरे कूचे थी रौशनी ज्यादा
इसलिए अक्ल साथ छोड़ गई
हम ने की दिल की पैरवी ज्यादा
जितने गम हो निबाह कर लेंगे
दिल पे अच्छी नहीं खुशी ज्यादा।
दोस्तों हम से तो गिरी ज्यादा
एक तेरे ग़म का भी सुरूर रहा
फिर यह काफिर भी कुछ चढी ज्यादा
तेरी नज़रों की जालसाजी में
हो गई हम से मयकशी ज्यादा
आज बैठा था बेहिजाब कोई
आज ही उठी प्यास भी ज्यादा
नामाबर उल्टे पाँव लौट आया
तेरे कूचे थी रौशनी ज्यादा
इसलिए अक्ल साथ छोड़ गई
हम ने की दिल की पैरवी ज्यादा
जितने गम हो निबाह कर लेंगे
दिल पे अच्छी नहीं खुशी ज्यादा।
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