यार सब पीछे हट गए मेरे
जैसे के हाथ काट गए मेरे
जिनको सींचा गया था बरसों तक
ख्वाब पल में उचट गए मेरे
तुझसे बाबस्ता कई ब्योरे थे
हाय वो पन्ने फट गए मेरे
तेरी नज़रों के एक इशारे पर
मुझसे सब गम लिपट गए मेरे
अपनी गूंजायिशों से घबरा कर
दर्द सारे सिमट गए मेरे
खाने-खाने से खिंच गए शायद
जान, जी, जिस्म बाँट गए मेरे
खेलना जानते नहीं तूफ़ान
सारे मोहरे उलट गए मेरे
Saturday, July 5, 2008
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