Saturday, July 5, 2008

साकी

साकी भी तुम जाम भी तुम
शमा भी तुम शाम भी तुम

गम छोटे डर गम छोटे
दर्द भी तुम आराम भी तुम

तुम में छुपे अशार कई
मेहनत भी तुम ईनाम भी तुम

पलकों का उठाना गिरना
कासिद भी तुम पैगाम भी तुम

हर लम्हा तुम हर जानिब
फुर्सत भी तुम काम भी तुम

तुम से शुरू तुम पे ही ख़तम
इश्क भी तुम अंजाम भी तुम

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