मेरे महबूब के हैं बाल मेरे कंधे पर
गाल होते हैं सुर्ख लाल मेरे कंधे पर
होश तुझको अगर नहीं है तो मुझको भी कहाँ
यार ऐसे न हो बेहाल मेरे कंधे पर
जो वज़न है वो मेरे दिल के हवाले कर दे
भार इतना न मगर दाल मेरे कंधे पर
दाने चुगने के लिए आए तो पंछी न गए
एक सैय्याद का है जाल मेरे कंधे पर।
Saturday, July 5, 2008
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