कौन कहता है हम ने पी ज्यादा
दोस्तों हम से तो गिरी ज्यादा
एक तेरे ग़म का भी सुरूर रहा
फिर यह काफिर भी कुछ चढी ज्यादा
तेरी नज़रों की जालसाजी में
हो गई हम से मयकशी ज्यादा
आज बैठा था बेहिजाब कोई
आज ही उठी प्यास भी ज्यादा
नामाबर उल्टे पाँव लौट आया
तेरे कूचे थी रौशनी ज्यादा
इसलिए अक्ल साथ छोड़ गई
हम ने की दिल की पैरवी ज्यादा
जितने गम हो निबाह कर लेंगे
दिल पे अच्छी नहीं खुशी ज्यादा।
Saturday, July 5, 2008
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